अध्याय 1, श्लोक 89
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधऋषिरुवाच तथेत्युक्त्वा भगवता शङ्खचक्रगदाभृता । कृत्वा चक्रेण वै छिन्ने जघने शिरसी तयोः ॥
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लिप्यंतरण
ṛṣiruvāca tathetyuktvā bhagavatā śaṅkhacakragadābhṛtā kṛtvā cakreṇa vai chinne jaghane śirasī tayoḥ
अर्थ
ऋषि बोले — 'ऐसा ही हो' कहकर शंख, चक्र, गदा धारण करने वाले भगवान् ने उन्हें अपनी जाँघों पर लेकर चक्र से उनके सिर काट डाले।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.89 का अर्थ क्या है?▼
ऋषि बोले — 'ऐसा ही हो' कहकर शंख, चक्र, गदा धारण करने वाले भगवान् ने उन्हें अपनी जाँघों पर लेकर चक्र से उनके सिर काट डाले।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 89वाँ श्लोक है।