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दुर्गा सप्तशती 1.87

अध्याय 1, श्लोक 87

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

ऋषिरुवाच वञ्चिताभ्यामिति तदा सर्वमापोमयं जगत्

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca vañcitābhyāmiti tadā sarvamāpomayaṃ jagat

अर्थ

ऋषि बोले — इस प्रकार ठगे जाकर, और समस्त जगत् को जल-मय देखकर,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.87 का अर्थ क्या है?
ऋषि बोले — इस प्रकार ठगे जाकर, और समस्त जगत् को जल-मय देखकर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 87वाँ श्लोक है।