अध्याय 1, श्लोक 86
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधकिमन्येन वरेणात्र एतावद्धि वृतं मया ॥
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लिप्यंतरण
kimanyena vareṇātra etāvaddhi vṛtaṃ mayā
अर्थ
यहाँ अन्य वर से क्या प्रयोजन? बस इतना ही मैंने माँगा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.86 का अर्थ क्या है?▼
यहाँ अन्य वर से क्या प्रयोजन? बस इतना ही मैंने माँगा है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 86वाँ श्लोक है।