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दुर्गा सप्तशती 1.83

अध्याय 1, श्लोक 83

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

पञ्चवर्षसहस्राणि बाहुप्रहरणो विभुः तावप्यतिबलोन्मत्तौ महामायाविमोहितौ

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लिप्यंतरण

pañcavarṣasahasrāṇi bāhupraharaṇo vibhuḥ tāvapyatibalonmattau mahāmāyāvimohitau

अर्थ

और वह विभु पाँच हज़ार वर्षों तक अपनी भुजाओं को ही शस्त्र बनाकर लड़ते रहे। महामाया से मोहित होकर अत्यंत बल से उन्मत्त वे दोनों,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.83 का अर्थ क्या है?
और वह विभु पाँच हज़ार वर्षों तक अपनी भुजाओं को ही शस्त्र बनाकर लड़ते रहे। महामाया से मोहित होकर अत्यंत बल से उन्मत्त वे दोनों,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 83वाँ श्लोक है।