अध्याय 1, श्लोक 82
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधक्रोधरक्तेक्षणावत्तुं ब्रह्माणं जनितोद्यमौ । समुत्थाय ततस्ताभ्यां युयुधे भगवान् हरिः ॥
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लिप्यंतरण
krodharaktekṣaṇāvattuṃ brahmāṇaṃ janitodyamau samutthāya tatastābhyāṃ yuyudhe bhagavān hariḥ
अर्थ
जो क्रोध से लाल नेत्र किए ब्रह्मा को खाने को उद्यत थे। तब भगवान् हरि उठकर उन दोनों से युद्ध करने लगे,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.82 का अर्थ क्या है?▼
जो क्रोध से लाल नेत्र किए ब्रह्मा को खाने को उद्यत थे। तब भगवान् हरि उठकर उन दोनों से युद्ध करने लगे,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 82वाँ श्लोक है।