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दुर्गा सप्तशती 1.81

अध्याय 1, श्लोक 81

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

एकार्णवेऽहिशयनात्ततः ददृशे तौ मधुकैटभौ दुरात्मानावतिवीर्यपराक्रमौ

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लिप्यंतरण

ekārṇave'hiśayanāttataḥ sa dadṛśe ca tau madhukaiṭabhau durātmānāvativīryaparākramau

अर्थ

एकार्णव में शेषनाग की शय्या से वे उठे; तब उन्होंने उन दोनों — अत्यंत वीर्य व पराक्रम वाले दुरात्मा मधु-कैटभ को देखा,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.81 का अर्थ क्या है?
एकार्णव में शेषनाग की शय्या से वे उठे; तब उन्होंने उन दोनों — अत्यंत वीर्य व पराक्रम वाले दुरात्मा मधु-कैटभ को देखा,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 81वाँ श्लोक है।