Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 1.80

अध्याय 1, श्लोक 80

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

निर्गम्य दर्शने तस्थौ ब्रह्मणोऽव्यक्तजन्मनः उत्तस्थौ जगन्नाथस्तया मुक्तो जनार्दनः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

nirgamya darśane tasthau brahmaṇo'vyaktajanmanaḥ uttasthau ca jagannāthastayā mukto janārdanaḥ

अर्थ

और अव्यक्त-जन्मा ब्रह्मा के सामने प्रकट हुईं। उनके द्वारा छोड़े गए जगन्नाथ जनार्दन उठ बैठे,

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.80 का अर्थ क्या है?
और अव्यक्त-जन्मा ब्रह्मा के सामने प्रकट हुईं। उनके द्वारा छोड़े गए जगन्नाथ जनार्दन उठ बैठे,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 80वाँ श्लोक है।