अध्याय 1, श्लोक 79
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधविष्णोः प्रबोधनार्थाय निहन्तुं मधुकैटभौ । नेत्रास्यनासिकाबाहुहृदयेभ्यस्तथोरसः ॥
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लिप्यंतरण
viṣṇoḥ prabodhanārthāya nihantuṃ madhukaiṭabhau netrāsyanāsikābāhuhṛdayebhyastathorasaḥ
अर्थ
विष्णु के नेत्र, मुख, नासिका, बाहु, हृदय और वक्षःस्थल से निकल पड़ीं,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.79 का अर्थ क्या है?▼
विष्णु के नेत्र, मुख, नासिका, बाहु, हृदय और वक्षःस्थल से निकल पड़ीं,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 79वाँ श्लोक है।