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दुर्गा सप्तशती 1.75

अध्याय 1, श्लोक 75

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

कारितास्ते यतोऽतस्त्वां कः स्तोतुं शक्तिमान् भवेत् सा त्वमित्थं प्रभावैः स्वैरुदारैर्देवि संस्तुता

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लिप्यंतरण

kāritāste yato'tastvāṃ kaḥ stotuṃ śaktimān bhavet sā tvamitthaṃ prabhāvaiḥ svairudārairdevi saṃstutā

अर्थ

इसलिए और कौन आपकी स्तुति करने में समर्थ होगा? हे देवी! इस प्रकार अपने उदार प्रभावों से स्तुति की हुई आप,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.75 का अर्थ क्या है?
इसलिए और कौन आपकी स्तुति करने में समर्थ होगा? हे देवी! इस प्रकार अपने उदार प्रभावों से स्तुति की हुई आप,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 75वाँ श्लोक है।