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दुर्गा सप्तशती 1.74

अध्याय 1, श्लोक 74

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

सोऽपि निद्रावशं नीतः कस्त्वां स्तोतुमिहेश्वरः विष्णुः शरीरग्रहणमहमीशान एव

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लिप्यंतरण

so'pi nidrāvaśaṃ nītaḥ kastvāṃ stotumiheśvaraḥ viṣṇuḥ śarīragrahaṇamahamīśāna eva ca

अर्थ

निद्रा के वश में कर दिया, तो यहाँ आपकी स्तुति करने में कौन समर्थ है? आपने ही विष्णु, मुझे और ईशान (शिव) को शरीर धारण कराया,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.74 का अर्थ क्या है?
निद्रा के वश में कर दिया, तो यहाँ आपकी स्तुति करने में कौन समर्थ है? आपने ही विष्णु, मुझे और ईशान (शिव) को शरीर धारण कराया,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 74वाँ श्लोक है।