अध्याय 1, श्लोक 73
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतस्य सर्वस्य या शक्तिः सा त्वं किं स्तूयसे मया । यया त्वया जगत्स्रष्टा जगत्पात्यत्ति यो जगत् ॥
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लिप्यंतरण
tasya sarvasya yā śaktiḥ sā tvaṃ kiṃ stūyase mayā yayā tvayā jagatsraṣṭā jagatpātyatti yo jagat
अर्थ
उन सबकी जो शक्ति है, वह आप ही हैं; फिर मैं आपकी स्तुति कैसे कर सकता हूँ? जब आपने जगत् के स्रष्टा, पालक और संहारक को भी,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.73 का अर्थ क्या है?▼
उन सबकी जो शक्ति है, वह आप ही हैं; फिर मैं आपकी स्तुति कैसे कर सकता हूँ? जब आपने जगत् के स्रष्टा, पालक और संहारक को भी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 73वाँ श्लोक है।