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दुर्गा सप्तशती 1.72

अध्याय 1, श्लोक 72

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी यच्च किञ्चित्क्वचिद्वस्तु सदसद्वाखिलात्मिके

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लिप्यंतरण

parāparāṇāṃ paramā tvameva parameśvarī yacca kiñcitkvacidvastu sadasadvākhilātmike

अर्थ

आप उच्च-नीच सबकी परा हैं; आप ही परमेश्वरी हैं। हे सर्वात्मिके! जो कुछ भी वस्तु कहीं भी है, सत् हो या असत्,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.72 का अर्थ क्या है?
आप उच्च-नीच सबकी परा हैं; आप ही परमेश्वरी हैं। हे सर्वात्मिके! जो कुछ भी वस्तु कहीं भी है, सत् हो या असत्,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 72वाँ श्लोक है।