अध्याय 1, श्लोक 71
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधशङ्खिनी चापिनी बाणभुशुण्डीपरिघायुधा । सौम्या सौम्यतराशेषसौम्येभ्यस्त्वतिसुन्दरी ॥
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लिप्यंतरण
śaṅkhinī cāpinī bāṇabhuśuṇḍīparighāyudhā saumyā saumyatarāśeṣasaumyebhyastvatisundarī
अर्थ
शंख व धनुष धारण करने वाली, बाण, भुशुण्डी और परिघ से सुसज्जित हैं। आप सौम्य हैं, समस्त सौम्यों से भी अधिक सौम्य, और अत्यंत सुंदर हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.71 का अर्थ क्या है?▼
शंख व धनुष धारण करने वाली, बाण, भुशुण्डी और परिघ से सुसज्जित हैं। आप सौम्य हैं, समस्त सौम्यों से भी अधिक सौम्य, और अत्यंत सुंदर हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 71वाँ श्लोक है।