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दुर्गा सप्तशती 1.70

अध्याय 1, श्लोक 70

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

लज्जा पुष्टिस्तथा तुष्टिस्त्वं शान्तिः क्षान्तिरेव खड्गिनी शूलिनी घोरा गदिनी चक्रिणी तथा

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लिप्यंतरण

lajjā puṣṭistathā tuṣṭistvaṃ śāntiḥ kṣāntireva ca khaḍginī śūlinī ghorā gadinī cakriṇī tathā

अर्थ

आप लज्जा, पुष्टि और तुष्टि हैं; आप शांति और क्षमा हैं। आप खड्ग व शूल धारण करने वाली, घोरा, गदा व चक्र धारण करने वाली,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.70 का अर्थ क्या है?
आप लज्जा, पुष्टि और तुष्टि हैं; आप शांति और क्षमा हैं। आप खड्ग व शूल धारण करने वाली, घोरा, गदा व चक्र धारण करने वाली,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 70वाँ श्लोक है।