अध्याय 1, श्लोक 68
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधमहामोहा च भवती महादेवी महेश्वरी । प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी ॥
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लिप्यंतरण
mahāmohā ca bhavatī mahādevī maheśvarī prakṛtistvaṃ ca sarvasya guṇatrayavibhāvinī
अर्थ
महामोह, महादेवी और महेश्वरी हैं। आप सबकी प्रकृति और तीनों गुणों को प्रकट करने वाली हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.68 का अर्थ क्या है?▼
महामोह, महादेवी और महेश्वरी हैं। आप सबकी प्रकृति और तीनों गुणों को प्रकट करने वाली हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 68वाँ श्लोक है।