अध्याय 1, श्लोक 67
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये । महाविद्या महामाया महामेधा महास्मृतिः ॥
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लिप्यंतरण
tathā saṃhṛtirūpānte jagato'sya jaganmaye mahāvidyā mahāmāyā mahāmedhā mahāsmṛtiḥ
अर्थ
सृष्टि के समय आप सृष्टिरूपा, पालन में स्थितिरूपा, और जगत् के अंत में संहाररूपा हैं, हे जगन्मयी! आप महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.67 का अर्थ क्या है?▼
सृष्टि के समय आप सृष्टिरूपा, पालन में स्थितिरूपा, और जगत् के अंत में संहाररूपा हैं, हे जगन्मयी! आप महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 67वाँ श्लोक है।