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दुर्गा सप्तशती 1.64

अध्याय 1, श्लोक 64

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता अर्धमात्रा स्थिता नित्या यानुच्चार्याविशेषतः

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लिप्यंतरण

sudhā tvamakṣare nitye tridhā mātrātmikā sthitā ardhamātrā sthitā nityā yānuccāryāviśeṣataḥ

अर्थ

हे नित्ये अक्षरे! आप सुधा हैं; आप (ॐकार की) तीन मात्राओं रूप में और अर्धमात्रा रूप में स्थित हैं,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.64 का अर्थ क्या है?
हे नित्ये अक्षरे! आप सुधा हैं; आप (ॐकार की) तीन मात्राओं रूप में और अर्धमात्रा रूप में स्थित हैं,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 64वाँ श्लोक है।