अध्याय 1, श्लोक 63
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधब्रह्मोवाच त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका ॥
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लिप्यंतरण
brahmovāca tvaṃ svāhā tvaṃ svadhā tvaṃ hi vaṣaṭkāraḥ svarātmikā
अर्थ
ब्रह्मा बोले — आप स्वाहा हैं, आप स्वधा हैं; आप ही वषट्कार और स्वर की आत्मा हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.63 का अर्थ क्या है?▼
ब्रह्मा बोले — आप स्वाहा हैं, आप स्वधा हैं; आप ही वषट्कार और स्वर की आत्मा हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 63वाँ श्लोक है।