अध्याय 1, श्लोक 61
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधविबोधनार्थाय हरेर्हरिनेत्रकृतालयाम् । विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम् ॥
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लिप्यंतरण
vibodhanārthāya harerharinetrakṛtālayām viśveśvarīṃ jagaddhātrīṃ sthitisaṃhārakāriṇīm
अर्थ
विष्णु को जगाने के लिए उन्होंने हरि के नेत्रों में निवास करने वाली, विश्वेश्वरी, जगत् की धात्री, स्थिति व संहार करने वाली,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.61 का अर्थ क्या है?▼
विष्णु को जगाने के लिए उन्होंने हरि के नेत्रों में निवास करने वाली, विश्वेश्वरी, जगत् की धात्री, स्थिति व संहार करने वाली,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 61वाँ श्लोक है।