अध्याय 1, श्लोक 56
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतथापि तत्समुत्पत्तिर्बहुधा श्रूयतां मम । देवानां कार्यसिद्ध्यर्थमाविर्भवति सा यदा ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tathāpi tatsamutpattirbahudhā śrūyatāṃ mama devānāṃ kāryasiddhyarthamāvirbhavati sā yadā
अर्थ
फिर भी उनका प्रादुर्भाव अनेक प्रकार से होता है; वह मुझसे सुनो। जब वे देवताओं के कार्य की सिद्धि के लिए प्रकट होती हैं,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.56 का अर्थ क्या है?▼
फिर भी उनका प्रादुर्भाव अनेक प्रकार से होता है; वह मुझसे सुनो। जब वे देवताओं के कार्य की सिद्धि के लिए प्रकट होती हैं,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 56वाँ श्लोक है।