अध्याय 1, श्लोक 54
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि त्वत्तो ब्रह्मविदां वर ॥
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लिप्यंतरण
tatsarvaṃ śrotumicchāmi tvatto brahmavidāṃ vara
अर्थ
हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ! वह सब मैं आपसे सुनना चाहता हूँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.54 का अर्थ क्या है?▼
हे ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ! वह सब मैं आपसे सुनना चाहता हूँ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 54वाँ श्लोक है।