अध्याय 1, श्लोक 53
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधब्रवीति कथमुत्पन्ना सा कर्मास्याश्च किं द्विज । यत्प्रभावा च सा देवी यत्स्वरूपा यदुद्भवा ॥
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लिप्यंतरण
bravīti kathamutpannā sā karmāsyāśca kiṃ dvija yatprabhāvā ca sā devī yatsvarūpā yadudbhavā
अर्थ
हे द्विज! वह कैसे उत्पन्न हुईं और उनका कर्म क्या है? उस देवी का प्रभाव क्या है, स्वरूप क्या है और उत्पत्ति कैसे हुई?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.53 का अर्थ क्या है?▼
हे द्विज! वह कैसे उत्पन्न हुईं और उनका कर्म क्या है? उस देवी का प्रभाव क्या है, स्वरूप क्या है और उत्पत्ति कैसे हुई?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 53वाँ श्लोक है।