अध्याय 1, श्लोक 51
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधसंसारबन्धहेतुश्च सैव सर्वेश्वरेश्वरी ॥
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लिप्यंतरण
saṃsārabandhahetuśca saiva sarveśvareśvarī
अर्थ
और वही संसार-बंधन की भी कारण है; वही समस्त ईश्वरों की भी ईश्वरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.51 का अर्थ क्या है?▼
और वही संसार-बंधन की भी कारण है; वही समस्त ईश्वरों की भी ईश्वरी है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 51वाँ श्लोक है।