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दुर्गा सप्तशती 1.49

अध्याय 1, श्लोक 49

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति तया विसृज्यते विश्वं जगदेतच्चराचरम्

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लिप्यंतरण

balādākṛṣya mohāya mahāmāyā prayacchati tayā visṛjyate viśvaṃ jagadetaccarācaram

अर्थ

मोह में डाल देती है। उसी के द्वारा यह सम्पूर्ण चराचर जगत् रचा जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.49 का अर्थ क्या है?
मोह में डाल देती है। उसी के द्वारा यह सम्पूर्ण चराचर जगत् रचा जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 49वाँ श्लोक है।