अध्याय 1, श्लोक 47
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधमहामायाप्रभावेण संसारस्थितिकारिणा । तन्नात्र विस्मयः कार्यो योगनिद्रा जगत्पतेः ॥
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लिप्यंतरण
mahāmāyāprabhāveṇa saṃsārasthitikāriṇā tannātra vismayaḥ kāryo yoganidrā jagatpateḥ
अर्थ
महामाया के प्रभाव से, जो संसार की स्थिति की कारण हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए; यह महामाया जगत्पति विष्णु की योगनिद्रा है,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.47 का अर्थ क्या है?▼
महामाया के प्रभाव से, जो संसार की स्थिति की कारण हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए; यह महामाया जगत्पति विष्णु की योगनिद्रा है,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 47वाँ श्लोक है।