अध्याय 1, श्लोक 44
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधमनुष्याणां च यत्तेषां तुल्यमन्यत्तथोभयोः । ज्ञानेऽपि सति पश्यैतान् पतङ्गाञ्छावचञ्चुषु ॥
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लिप्यंतरण
manuṣyāṇāṃ ca yatteṣāṃ tulyamanyattathobhayoḥ jñāne'pi sati paśyaitān pataṅgāñchāvacañcuṣu
अर्थ
और जो उनको है वह मनुष्यों को भी; शेष (आहार-निद्रा आदि) दोनों में समान है। ज्ञान होते हुए भी इन पक्षियों को देखो,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.44 का अर्थ क्या है?▼
और जो उनको है वह मनुष्यों को भी; शेष (आहार-निद्रा आदि) दोनों में समान है। ज्ञान होते हुए भी इन पक्षियों को देखो,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 44वाँ श्लोक है।