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दुर्गा सप्तशती 1.43

अध्याय 1, श्लोक 43

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

यतो हि ज्ञानिनः सर्वे पशुपक्षिमृगादयः ज्ञानं तन्मनुष्याणां यत्तेषां मृगपक्षिणाम्

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लिप्यंतरण

yato hi jñāninaḥ sarve paśupakṣimṛgādayaḥ jñānaṃ ca tanmanuṣyāṇāṃ yatteṣāṃ mṛgapakṣiṇām

अर्थ

क्योंकि पशु, पक्षी, मृग आदि सभी ज्ञानयुक्त हैं। जो ज्ञान मनुष्यों को है, वही उन पशु-पक्षियों को भी है;

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.43 का अर्थ क्या है?
क्योंकि पशु, पक्षी, मृग आदि सभी ज्ञानयुक्त हैं। जो ज्ञान मनुष्यों को है, वही उन पशु-पक्षियों को भी है;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 43वाँ श्लोक है।