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दुर्गा सप्तशती 1.4

अध्याय 1, श्लोक 4

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

तस्य पालयतः सम्यक् प्रजाः पुत्रानिवौरसान् बभूवुः शत्रवो भूपाः कोलाविध्वंसिनस्तदा

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लिप्यंतरण

tasya pālayataḥ samyak prajāḥ putrānivaurasān babhūvuḥ śatravo bhūpāḥ kolāvidhvaṃsinastadā

अर्थ

जब वे अपनी प्रजा की औरस पुत्रों की भाँति भलीभाँति रक्षा कर रहे थे, तब कोलविध्वंसी नामक राजा उनके शत्रु बन गए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.4 का अर्थ क्या है?
जब वे अपनी प्रजा की औरस पुत्रों की भाँति भलीभाँति रक्षा कर रहे थे, तब कोलविध्वंसी नामक राजा उनके शत्रु बन गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 4वाँ श्लोक है।