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दुर्गा सप्तशती 1.3

अध्याय 1, श्लोक 3

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

स्वारोचिषेऽन्तरे पूर्वं चैत्रवंशसमुद्भवः सुरथो नाम राजाभूत्समस्ते क्षितिमण्डले

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लिप्यंतरण

svārociṣe'ntare pūrvaṃ caitravaṃśasamudbhavaḥ suratho nāma rājābhūtsamaste kṣitimaṇḍale

अर्थ

पूर्वकाल में स्वारोचिष मन्वन्तर में चैत्रवंश में उत्पन्न सुरथ नामक एक राजा थे, जो समस्त पृथ्वीमंडल पर राज्य करते थे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.3 का अर्थ क्या है?
पूर्वकाल में स्वारोचिष मन्वन्तर में चैत्रवंश में उत्पन्न सुरथ नामक एक राजा थे, जो समस्त पृथ्वीमंडल पर राज्य करते थे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 3वाँ श्लोक है।