अध्याय 1, श्लोक 2
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधमहामायानुभावेन यथा मन्वन्तराधिपः । स बभूव महाभागः सावर्णिस्तनयो रवेः ॥
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लिप्यंतरण
mahāmāyānubhāvena yathā manvantarādhipaḥ sa babhūva mahābhāgaḥ sāvarṇistanayo raveḥ
अर्थ
कि महामाया के प्रभाव से वे महाभाग सूर्यपुत्र सावर्णि किस प्रकार मन्वन्तर के अधिपति (मनु) हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.2 का अर्थ क्या है?▼
कि महामाया के प्रभाव से वे महाभाग सूर्यपुत्र सावर्णि किस प्रकार मन्वन्तर के अधिपति (मनु) हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 2वाँ श्लोक है।