अध्याय 1, श्लोक 38
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधदृष्टदोषेऽपि विषये ममत्वाकृष्टमानसौ । तत्किमेतन्महाभाग यन्मोहो ज्ञानिनोरपि ॥
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लिप्यंतरण
dṛṣṭadoṣe'pi viṣaye mamatvākṛṣṭamānasau tatkimetanmahābhāga yanmoho jñāninorapi
अर्थ
यद्यपि हम विषयों के दोष देखते हैं, फिर भी ममता से हमारे मन आकृष्ट हैं। हे महाभाग! यह कैसी बात है कि यह मोह ज्ञानियों में भी होता है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.38 का अर्थ क्या है?▼
यद्यपि हम विषयों के दोष देखते हैं, फिर भी ममता से हमारे मन आकृष्ट हैं। हे महाभाग! यह कैसी बात है कि यह मोह ज्ञानियों में भी होता है?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 38वाँ श्लोक है।