Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 1.31

अध्याय 1, श्लोक 31

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

मार्कण्डेय उवाच ततस्तौ सहितौ विप्र तं मुनिं समुपस्थितौ

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

mārkaṇḍeya uvāca tatastau sahitau vipra taṃ muniṃ samupasthitau

अर्थ

मार्कण्डेय बोले — हे ब्राह्मण! तब वे दोनों — वैश्य और राजा — मिलकर मुनि के पास गए।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.31 का अर्थ क्या है?
मार्कण्डेय बोले — हे ब्राह्मण! तब वे दोनों — वैश्य और राजा — मिलकर मुनि के पास गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 31वाँ श्लोक है।