अध्याय 1, श्लोक 30
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधकरोमि किं यन्न मनस्तेष्वप्रीतिषु निष्ठुरम् ॥
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लिप्यंतरण
karomi kiṃ yanna manasteṣvaprītiṣu niṣṭhuram
अर्थ
मैं क्या करूँ कि उन प्रेमरहित लोगों के प्रति भी मेरा मन कठोर नहीं होता?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.30 का अर्थ क्या है?▼
मैं क्या करूँ कि उन प्रेमरहित लोगों के प्रति भी मेरा मन कठोर नहीं होता?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 30वाँ श्लोक है।