अध्याय 1, श्लोक 29
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधयत्प्रेमप्रवणं चित्तं विगुणेष्वपि बन्धुषु । तेषां कृते मे निःश्वासो दौर्मनस्यं च जायते ॥
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लिप्यंतरण
yatpremapravaṇaṃ cittaṃ viguṇeṣvapi bandhuṣu teṣāṃ kṛte me niḥśvāso daurmanasyaṃ ca jāyate
अर्थ
कि अवगुणी बंधुओं के प्रति भी मेरा चित्त प्रेममय रहता है। उनके लिए मुझे ठंडी साँसें भरनी पड़ती हैं और मन उदास होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.29 का अर्थ क्या है?▼
कि अवगुणी बंधुओं के प्रति भी मेरा चित्त प्रेममय रहता है। उनके लिए मुझे ठंडी साँसें भरनी पड़ती हैं और मन उदास होता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 29वाँ श्लोक है।