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दुर्गा सप्तशती 1.22

अध्याय 1, श्लोक 22

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

प्रवृत्तिं स्वजनानां दाराणां चात्र संस्थितः किं नु तेषां गृहे क्षेममक्षेमं किं नु साम्प्रतम्

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लिप्यंतरण

pravṛttiṃ svajanānāṃ ca dārāṇāṃ cātra saṃsthitaḥ kiṃ nu teṣāṃ gṛhe kṣemamakṣemaṃ kiṃ nu sāmpratam

अर्थ

यहाँ रहते हुए मैं अपने स्वजनों और स्त्री के समाचार नहीं जानता। इस समय घर में उनका क्षेम है या अक्षेम?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.22 का अर्थ क्या है?
यहाँ रहते हुए मैं अपने स्वजनों और स्त्री के समाचार नहीं जानता। इस समय घर में उनका क्षेम है या अक्षेम?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 22वाँ श्लोक है।