अध्याय 1, श्लोक 21
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधवनमभ्यागतो दुःखी निरस्तश्चाप्तबन्धुभिः । सोऽहं न वेद्मि पुत्राणां कुशलाकुशलात्मिकाम् ॥
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लिप्यंतरण
vanamabhyāgato duḥkhī nirastaścāptabandhubhiḥ so'haṃ na vedmi putrāṇāṃ kuśalākuśalātmikām
अर्थ
दुःखी होकर वन में आया हूँ, अपने विश्वसनीय बंधुओं द्वारा त्याग दिया गया। यहाँ रहते हुए मैं अपने पुत्रों के कुशल-अकुशल को नहीं जानता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.21 का अर्थ क्या है?▼
दुःखी होकर वन में आया हूँ, अपने विश्वसनीय बंधुओं द्वारा त्याग दिया गया। यहाँ रहते हुए मैं अपने पुत्रों के कुशल-अकुशल को नहीं जानता।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 21वाँ श्लोक है।