अध्याय 1, श्लोक 20
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधपुत्रदारैर्निरस्तश्च धनलोभादसाधुभिः । विहीनश्च धनैर्दारैः पुत्रैरादाय मे धनम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
putradārairnirastaśca dhanalobhādasādhubhiḥ vihīnaśca dhanairdāraiḥ putrairādāya me dhanam
अर्थ
धन के लोभ से दुष्ट पुत्रों और स्त्री ने मुझे निकाल दिया; मेरे पुत्रों ने मेरा धन छीन लिया और मैं धन, स्त्री व पुत्रों से वंचित हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.20 का अर्थ क्या है?▼
धन के लोभ से दुष्ट पुत्रों और स्त्री ने मुझे निकाल दिया; मेरे पुत्रों ने मेरा धन छीन लिया और मैं धन, स्त्री व पुत्रों से वंचित हो गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 20वाँ श्लोक है।