अध्याय 1, श्लोक 19
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधवैश्य उवाच समाधिर्नाम वैश्योऽहमुत्पन्नो धनिनां कुले ॥
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लिप्यंतरण
vaiśya uvāca samādhirnāma vaiśyo'hamutpanno dhanināṃ kule
अर्थ
वैश्य बोला — मैं समाधि नामक वैश्य हूँ, धनवानों के कुल में उत्पन्न।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.19 का अर्थ क्या है?▼
वैश्य बोला — मैं समाधि नामक वैश्य हूँ, धनवानों के कुल में उत्पन्न।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 19वाँ श्लोक है।