अध्याय 1, श्लोक 18
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधप्रत्युवाच स तं वैश्यः प्रश्रयावनतो नृपम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
pratyuvāca sa taṃ vaiśyaḥ praśrayāvanato nṛpam
अर्थ
वह वैश्य विनयपूर्वक झुककर राजा को उत्तर देने लगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.18 का अर्थ क्या है?▼
वह वैश्य विनयपूर्वक झुककर राजा को उत्तर देने लगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 18वाँ श्लोक है।