अध्याय 1, श्लोक 17
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधसशोक इव कस्मात्त्वं दुर्मना इव लक्ष्यसे । इत्याकर्ण्य वचस्तस्य भूपतेः प्रणयोदितम् ॥
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लिप्यंतरण
saśoka iva kasmāttvaṃ durmanā iva lakṣyase ityākarṇya vacastasya bhūpateḥ praṇayoditam
अर्थ
आप शोकग्रस्त और उदासमन से क्यों दिखाई दे रहे हैं?' राजा के इन प्रेमपूर्ण वचनों को सुनकर,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.17 का अर्थ क्या है?▼
आप शोकग्रस्त और उदासमन से क्यों दिखाई दे रहे हैं?' राजा के इन प्रेमपूर्ण वचनों को सुनकर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 17वाँ श्लोक है।