अध्याय 1, श्लोक 16
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतत्र विप्राश्रमाभ्याशे वैश्यमेकं ददर्श सः । स पृष्टस्तेन कस्त्वं भो हेतुश्चागमनेऽत्र कः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tatra viprāśramābhyāśe vaiśyamekaṃ dadarśa saḥ sa pṛṣṭastena kastvaṃ bho hetuścāgamane'tra kaḥ
अर्थ
वहाँ मुनि के आश्रम के समीप राजा ने एक वैश्य को देखा। राजा ने उससे पूछा — 'हे महानुभाव! आप कौन हैं? और यहाँ आने का क्या कारण है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.16 का अर्थ क्या है?▼
वहाँ मुनि के आश्रम के समीप राजा ने एक वैश्य को देखा। राजा ने उससे पूछा — 'हे महानुभाव! आप कौन हैं? और यहाँ आने का क्या कारण है?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 16वाँ श्लोक है।