Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 1.15

अध्याय 1, श्लोक 15

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

सञ्चितः सोऽतिदुःखेन क्षयं कोशो गमिष्यति एतच्चान्यच्च सततं चिन्तयामास पार्थिवः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

sañcitaḥ so'tiduḥkhena kṣayaṃ kośo gamiṣyati etaccānyacca satataṃ cintayāmāsa pārthivaḥ

अर्थ

बड़े कष्ट से संचित वह कोश नष्ट हो जाएगा।' इस प्रकार राजा निरंतर इन्हीं और अन्य बातों की चिंता करते रहे।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.15 का अर्थ क्या है?
बड़े कष्ट से संचित वह कोश नष्ट हो जाएगा।' इस प्रकार राजा निरंतर इन्हीं और अन्य बातों की चिंता करते रहे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 15वाँ श्लोक है।