Mantra.Tips
सुंदरकांड

दोहा 22 / 60

पाठ सुनें

🔊 किसी भी पंक्ति को सुनने के लिए टैप करें — या पूरी चौपाई सुनने के लिए ▶ दबाएँ

Chaupāī

जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई॥ समर बालि सन करि जसु पावा। सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा॥ खायउँ फल प्रभु लागी भूँखा। कपि सुभाव तें तोरेउँ रूखा॥ सब कें देह परम प्रिय स्वामी। मारहिं मोहि कुमारग गामी॥ जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे। तेहि पर बाँधेउ तनयँ तुम्हारे॥ मोहि कछु बाँधे कइ लाजा। कीन्ह चहउँ निज प्रभु कर काजा॥ बिनती करउँ जोरि कर रावन। सुनहु मान तजि मोर सिखावन॥ देखहु तुम्ह निज कुलहि बिचारी। भ्रम तजि भजहु भगत भय हारी॥ जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई॥ तासों बयरु कबहुँ नहिं कीजै। मोरे कहें जानकी दीजै॥

jānau~ maiṃ tumhāri prabhutāī sahasabāhu sana parī larāī samara bāli sana kari jasu pāvā suni kapi bacana bihasi biharāvā khāyau~ phala prabhu lāgī bhū~khā kapi subhāva teṃ toreu~ rūkhā saba keṃ deha parama priya svāmī mārahiṃ mohi kumāraga gāmī jinha mohi mārā te maiṃ māre tehi para bā~dheu tanaya~ tumhāre mohi na kachu bā~dhe kai lājā kīnha cahau~ nija prabhu kara kājā binatī karau~ jori kara rāvana sunahu māna taji mora sikhāvana dekhahu tumha nija kulahi bicārī bhrama taji bhajahu bhagata bhaya hārī jākeṃ ḍara ati kāla ḍerāī jo sura asura carācara khāī tāsoṃ bayaru kabahu~ nahiṃ kījai more kaheṃ jānakī dījai

Dohā

प्रनतपाल रघुनायक करुना सिंधु खरारि। गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि॥22॥

pranatapāla raghunāyaka karunā siṃdhu kharāri gae~ sarana prabhu rākhihaiṃ tava aparādha bisāri 22

अर्थ"मैं तुम्हारी प्रभुता जानता हूँ — सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई पड़ी, और बालि से युद्ध कर तुमने यश पाया।" कपि के वचन सुनकर (रावण) हँसकर टाल गया। "हे प्रभु! मैंने भूख लगने से फल खाए, और कपि के स्वभाव से वृक्ष तोड़े। हे स्वामी! सबको अपना शरीर परम प्रिय है; (फिर भी) कुमार्गगामियों ने मुझे मारा; जिन्होंने मुझे मारा उन्हें मैंने मारा — उस पर तुम्हारे पुत्र ने मुझे बाँधा। मुझे बँधने की कुछ लाज नहीं; मैं तो अपने प्रभु का कार्य करना चाहता हूँ। हे रावण! हाथ जोड़कर विनती करता हूँ: मान त्यागकर मेरी सीख सुनो। अपने कुल पर विचार करो; भ्रम तजकर भक्तों का भय हरने वाले (राम) को भजो। जिनके डर से काल भी अत्यंत डरता है, जो देव-असुर और चराचर को खा जाते हैं — उनसे कभी बैर मत करो; मेरे कहने से जानकी दे दो। प्रणतपाल रघुनाथ, करुणासिंधु, खरारि — शरण जाने पर प्रभु तुम्हारा अपराध भुलाकर तुम्हें रख लेंगे।"
साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुंदरकांड दोहा 22 का अर्थ क्या है?
"मैं तुम्हारी प्रभुता जानता हूँ — सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई पड़ी, और बालि से युद्ध कर तुमने यश पाया।" कपि के वचन सुनकर (रावण) हँसकर टाल गया। "हे प्रभु! मैंने भूख लगने से फल खाए, और कपि के स्वभाव से वृक्ष तोड़े। हे स्वामी! सबको अपना शरीर परम प्रिय है; (फिर भी) कुमार्गगामियों ने मुझे मारा; जिन्होंने मुझे मारा उन्हें मैंने मारा — उस पर तुम्हारे पुत्र ने मुझे बाँधा। मुझे बँधने की कुछ लाज नहीं; मैं तो अपने प्रभु का कार्य करना चाहता हूँ। हे रावण! हाथ जोड़कर विनती करता हूँ: मान त्यागकर मेरी सीख सुनो। अपने कुल पर विचार करो; भ्रम तजकर भक्तों का भय हरने वाले (राम) को भजो। जिनके डर से काल भी अत्यंत डरता है, जो देव-असुर और चराचर को खा जाते हैं — उनसे कभी बैर मत करो; मेरे कहने से जानकी दे दो। प्रणतपाल रघुनाथ, करुणासिंधु, खरारि — शरण जाने पर प्रभु तुम्हारा अपराध भुलाकर तुम्हें रख लेंगे।"