अध्याय 8, श्लोक 61
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधनीरक्तश्च महीपाल रक्तबीजो महासुरः । ततस्ते हर्षमतुलमवापुस्त्रिदशा नृप ॥
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लिप्यंतरण
nīraktaśca mahīpāla raktabījo mahāsuraḥ tataste harṣamatulamavāpustridaśā nṛpa
अर्थ
हे राजन्! और वह महान् असुर रक्तबीज रक्तहीन हो गया; तब देवता अतुलनीय हर्ष को प्राप्त हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.61 का अर्थ क्या है?▼
हे राजन्! और वह महान् असुर रक्तबीज रक्तहीन हो गया; तब देवता अतुलनीय हर्ष को प्राप्त हुए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 61वाँ श्लोक है।