अध्याय 3, श्लोक 8
अध्याय 3: Mahiṣāsura Vadha — महिषासुरवधचिक्षेप च ततस्तत्तु भद्रकाल्यां महासुरः । जाज्वल्यमानं तेजोभी रविबिम्बमिवाम्बरात् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
cikṣepa ca tatastattu bhadrakālyāṃ mahāsuraḥ jājvalyamānaṃ tejobhī ravibimbamivāmbarāt
अर्थ
तब उस महान् असुर ने भद्रकाली पर वह शूल फेंका, जो तेज से जाज्वल्यमान था, मानो आकाश से गिरता सूर्यबिम्ब हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 3.8 का अर्थ क्या है?▼
तब उस महान् असुर ने भद्रकाली पर वह शूल फेंका, जो तेज से जाज्वल्यमान था, मानो आकाश से गिरता सूर्यबिम्ब हो।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 3 (Mahiṣāsura Vadha — महिषासुर वध) का 8वाँ श्लोक है।