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दुर्गा सप्तशती 1.77

अध्याय 1, श्लोक 77

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

बोधश्च क्रियतामस्य हन्तुमेतौ महासुरौ

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लिप्यंतरण

bodhaśca kriyatāmasya hantumetau mahāsurau

अर्थ

और इन दोनों महान् असुरों के वध के लिए उनमें जागृति उत्पन्न कीजिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.77 का अर्थ क्या है?
और इन दोनों महान् असुरों के वध के लिए उनमें जागृति उत्पन्न कीजिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 77वाँ श्लोक है।