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दुर्गा सप्तशती 1.40

अध्याय 1, श्लोक 40

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

ऋषिरुवाच ज्ञानमस्ति समस्तस्य जन्तोर्विषयगोचरे

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca jñānamasti samastasya jantorviṣayagocare

अर्थ

ऋषि बोले — प्रत्येक प्राणी को इन्द्रिय-गोचर विषयों का ज्ञान होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.40 का अर्थ क्या है?
ऋषि बोले — प्रत्येक प्राणी को इन्द्रिय-गोचर विषयों का ज्ञान होता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 40वाँ श्लोक है।