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दुर्गा सप्तशती 1.25

अध्याय 1, श्लोक 25

अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadhaमधुकैटभवध

तेषु किं भवतः स्नेहमनुबध्नाति मानसम्

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लिप्यंतरण

teṣu kiṃ bhavataḥ snehamanubadhnāti mānasam

अर्थ

उनमें आपका मन अब भी स्नेह क्यों बाँधे हुए है?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 1.25 का अर्थ क्या है?
उनमें आपका मन अब भी स्नेह क्यों बाँधे हुए है?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 25वाँ श्लोक है।