अध्याय 1, श्लोक 25
अध्याय 1: Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधुकैटभवधतेषु किं भवतः स्नेहमनुबध्नाति मानसम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
teṣu kiṃ bhavataḥ snehamanubadhnāti mānasam
अर्थ
उनमें आपका मन अब भी स्नेह क्यों बाँधे हुए है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 1.25 का अर्थ क्या है?▼
उनमें आपका मन अब भी स्नेह क्यों बाँधे हुए है?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 1 (Madhu-Kaiṭabha Vadha — मधु-कैटभ वध) का 25वाँ श्लोक है।