प्रदोष व्रत तिथियाँ 2026, 2027 व 2028 — प्रदोष कैलेंडर
प्रदोष व्रत — प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को, प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे) में रखा जाने वाला — भगवान शिव के सबसे प्रिय व्रतों में से एक है। यह अपने वार के नाम से जाना जाता है: सोम प्रदोष (सोमवार) व शनि प्रदोष (शनिवार) सबसे प्रभावशाली हैं। इसे करने से पाप नष्ट होते हैं और स्वास्थ्य, संतान व शिव की कृपा मिलती है। नीचे की तिथियाँ नई दिल्ली के प्रदोष काल अनुसार हैं।
🔱 प्रदोष 2026· 25
गुरुवार, 1 जनवरीगुरु प्रदोषशुक्रवार, 16 जनवरीशुक्र प्रदोषशुक्रवार, 30 जनवरीशुक्र प्रदोषशनिवार, 14 फ़रवरीशनि प्रदोषरविवार, 1 मार्चरवि प्रदोषसोमवार, 16 मार्चसोम प्रदोषसोमवार, 30 मार्चसोम प्रदोषबुधवार, 15 अप्रैलबुध प्रदोषमंगलवार, 28 अप्रैलभौम प्रदोषगुरुवार, 14 मईगुरु प्रदोषगुरुवार, 28 मईगुरु प्रदोषशुक्रवार, 12 जूनशुक्र प्रदोषशनिवार, 27 जूनशनि प्रदोषरविवार, 12 जुलाईरवि प्रदोषरविवार, 26 जुलाईरवि प्रदोषसोमवार, 10 अगस्तसोम प्रदोषमंगलवार, 25 अगस्तभौम प्रदोषमंगलवार, 8 सितंबरभौम प्रदोषगुरुवार, 24 सितंबरगुरु प्रदोषगुरुवार, 8 अक्टूबरगुरु प्रदोषशुक्रवार, 23 अक्टूबरशुक्र प्रदोषशुक्रवार, 6 नवंबरशुक्र प्रदोषरविवार, 22 नवंबररवि प्रदोषरविवार, 6 दिसंबररवि प्रदोषसोमवार, 21 दिसंबरसोम प्रदोष
🔱 प्रदोष 2027· 25
सोमवार, 4 जनवरीसोम प्रदोषबुधवार, 20 जनवरीबुध प्रदोषबुधवार, 3 फ़रवरीबुध प्रदोषगुरुवार, 18 फ़रवरीगुरु प्रदोषशुक्रवार, 5 मार्चशुक्र प्रदोषशनिवार, 20 मार्चशनि प्रदोषरविवार, 4 अप्रैलरवि प्रदोषरविवार, 18 अप्रैलरवि प्रदोषसोमवार, 3 मईसोम प्रदोषसोमवार, 17 मईसोम प्रदोषबुधवार, 2 जूनबुध प्रदोषबुधवार, 16 जूनबुध प्रदोषगुरुवार, 1 जुलाईगुरु प्रदोषगुरुवार, 15 जुलाईगुरु प्रदोषशनिवार, 31 जुलाईशनि प्रदोषशनिवार, 14 अगस्तशनि प्रदोषरविवार, 29 अगस्तरवि प्रदोषसोमवार, 13 सितंबरसोम प्रदोषसोमवार, 27 सितंबरसोम प्रदोषमंगलवार, 12 अक्टूबरभौम प्रदोषबुधवार, 27 अक्टूबरबुध प्रदोषगुरुवार, 11 नवंबरगुरु प्रदोषगुरुवार, 25 नवंबरगुरु प्रदोषशनिवार, 11 दिसंबरशनि प्रदोषशनिवार, 25 दिसंबरशनि प्रदोष
🔱 प्रदोष 2028· 25
रविवार, 9 जनवरीरवि प्रदोषरविवार, 23 जनवरीरवि प्रदोषमंगलवार, 8 फ़रवरीभौम प्रदोषमंगलवार, 22 फ़रवरीभौम प्रदोषबुधवार, 8 मार्चबुध प्रदोषगुरुवार, 23 मार्चगुरु प्रदोषशुक्रवार, 7 अप्रैलशुक्र प्रदोषशनिवार, 22 अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार, 6 मईशनि प्रदोषरविवार, 21 मईरवि प्रदोषरविवार, 4 जूनरवि प्रदोषमंगलवार, 20 जूनभौम प्रदोषमंगलवार, 4 जुलाईभौम प्रदोषबुधवार, 19 जुलाईबुध प्रदोषबुधवार, 2 अगस्तबुध प्रदोषशुक्रवार, 18 अगस्तशुक्र प्रदोषशुक्रवार, 1 सितंबरशुक्र प्रदोषशनिवार, 16 सितंबरशनि प्रदोषशनिवार, 30 सितंबरशनि प्रदोषरविवार, 15 अक्टूबररवि प्रदोषसोमवार, 30 अक्टूबरसोम प्रदोषमंगलवार, 14 नवंबरभौम प्रदोषबुधवार, 29 नवंबरबुध प्रदोषबुधवार, 13 दिसंबरबुध प्रदोषशुक्रवार, 29 दिसंबरशुक्र प्रदोष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रदोष व्रत क्या है?▼
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित, दोनों पक्षों की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को रखा जाने वाला उपवास है। पूजा प्रदोष काल में — सूर्यास्त के तुरंत बाद के लगभग डेढ़ घंटे के शुभ समय में — की जाती है।
सोम प्रदोष व शनि प्रदोष क्या हैं?▼
प्रदोष का नाम उसके वार पर पड़ता है। सोम प्रदोष (सोमवार) मनोकामना पूर्ति व सुखी दाम्पत्य हेतु रखा जाता है; शनि प्रदोष (शनिवार) कष्ट निवारण व संतान हेतु। भौम (मंगल), गुरु (गुरुवार) आदि सभी अपने-अपने फल देते हैं।
प्रदोष व्रत कैसे रखा जाता है?▼
भक्त दिन भर उपवास रखते हैं, फिर स्नान कर प्रदोष काल (सूर्यास्त के तुरंत बाद) में जल, बिल्व पत्र व दीप के साथ "ॐ नमः शिवाय" तथा शिव चालीसा या प्रदोष स्तोत्र का जाप करते हुए भगवान शिव की पूजा करते हैं, फिर पारण करते हैं।
तिथियाँ नई दिल्ली पंचांग अनुसार गणना की गई हैं; क्षेत्रानुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
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