वक्रतुण्ड महाकाय — गणेश श्लोक PDF
वक्रतुण्ड महाकाय — गणेश श्लोक की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada
हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ों सूर्यों-सी प्रभा वाले गणेश! मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न करें।
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
Shuklambaradharam Vishnum Shashivarnam Chaturbhujam Prasannavadanam Dhyayet Sarvavighnopashantaye
श्वेत वस्त्रधारी, सर्वव्यापक विष्णु, चन्द्र-से वर्ण वाले, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख का — समस्त विघ्नों की शान्ति हेतु — ध्यान करें।
अगजानन पद्मार्कं गजाननं अहर्निशम्। अनेकदन्तं भक्तानां एकदन्तं उपास्महे॥
Agajanana Padmarkam Gajaananam Aharnisham Anekadantam Bhaktanam Ekadantam Upasmahe
अगजा (पार्वती) के मुखकमल के लिए सूर्य-समान गजानन का हम दिन-रात वन्दन करते हैं; अनेक दाँतों वाले, भक्तों के विघ्नों का नाश करने वाले को नमस्कार।